June 22, 2018
Ramdhari Singh Dinkar

कलम, आज उनकी जय बोल – Ramdhari Singh Dinkar

जो अगणित लघु दीप हमारे, तूफ़ानों में एक किनारे, जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन, मांगा नहीं स्नेह मुँह खोल। कलम, आज उनकी जय बोल। पीकर जिनकी […]
March 6, 2018

Some Relations Cannot Be Defined

कुछ बदली से मैं हूँ, कुछ बदला सा तू भी है, पर रिश्ता तो अपना आज भी उतना ही गहरा है। सलवटे पड़ी थी कुछ वक़्त […]
July 7, 2017
pani

पानी

मुझे भी पानी बनना है, बूँद बूँद जुड़ एक दिन समंदर बनना है… जैसे निस्छल निस्वार्थ है वो, मुझे भी इतना निर्मल बनना है… जितनी सहजता […]
June 27, 2017
coffee

A Cup Of Coffee

सिर्फ़ एक प्याला नहीं है वो दरिया है जस्बातो का… कभी गम भुलाने कभी जश्‍न मनाने वो गवाह बना है अलग अलग मौको का… कभी हल्का […]