सदिया गुजार दी हमने जिसके इंतजार में.

उम्मीदों से बंधा एक जिद्दी परिंदा हैं इंसान, जो घायल भी उमीदो से हैं और..
April 2, 2018
The crowd always runs on the path which seems easy,
April 3, 2018

सदिया गुजार दी हमने जिसके इंतजार में.

सदिया गुजार दी हमने जिसके इंतजार में

वो आके पूछते हैं क्यू बेठे हो बेकार में |

वक्त आया लोगो ने असलियत दिखा दी

एक हम ही थे जो डूबे रह गये किरदार में |

अब की बार मौसम आये नही फूलो वाले

शायद क्युकि उन्होंने कहा था वो आयेंगे बहार में |

इस से पहले की हम कुछ समझ पाते

आधी जिंदगी गुजर गयी जाने किस रफ़्तार में |

कोन कहता हैं खुशिया बिकती नही

हमने कल ही खरीदी , एक बोतल बाज़ार में |

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